Sunday, September 29, 2019

क्या अपकृत्य विधि व संविदा भंग दोनो का दोषी किसी को बनाया जा सकता है?

कुछ मामलों में अपकृत्य विधि व संविदा भंग दोनो का दोषी बनाया जा सकता है ऐसा तभी होता है जब किसी ऐसे कर्तव्य का उल्लंघन होता है जिसका सृजन विधि और संविदा दोनों ही करते हैं।

जब कोई व्यक्ति किसी डाक्टर से आपरेशन करवाता है तो आपरेशन करते समय डाक्टर को युक्तयुक्त सावधानी रखनी चाहिए यह विधिरोपित संविदा है वहीं डाक्टर असावधानी पूर्वक आपरेशन करता है तो वहां अपकृत्य व संविदा भंग दोनो के लिए दोषी होगा

पीड़ित व्यक्ति डाक्टर के विरूद्ध दोनों में से किसी एक के लिए वाद दायर कर सकता है।

न्यास-भंग व अपकृत्य क्या दोनो में विभेद है

दोनो में उपचार के मामले में भिन्न है अपकृत्य के मामले में अपरिनिर्धारित नुकसानी के लिए दावा किया जा सकता है परन्तु न्यास-भंग के मामले में अपरिनिर्धारित नुकसानी के लिए नहीं किया जा सकता।

अपकृत्य में कर्तव्य विधि द्वारा सृजित होता है परन्तु न्यास के मामले में कर्तव्य अंशत: पक्षकारों द्वारा सृजित होता है और अंशत: विधि द्वारा.


न्यास भंग में कर्तव्य हिताधिकारी के प्रति होता है सामान्यत: सभी व्यक्तियों के प्रति नहीं अपकृत्य साधरणतया सभी व्यक्तियों के प्रति होता है।

अपकृत्य व संविदा कल्प 

कुछ ऐसी परिस्थितियों के दौरान कोई विशेष व्यक्ति जिसने न तो संविदा किया है और न अपकृत्य अपने किसी दायित्व का पालन करें।

अर्थात यदि कोई व्यक्ति दूसरे किसी व्यक्ति के घर पर कुछ वस्तुएं भूल से छोड़ देता है तो उनकी सुरक्षा और वापस करने का दायित्व उस पर होगा । ऐसे दायित्व को संविदा कल्पिक दायित्व कहते है भारतीय संविदा अधिनियम में संविदा कल्प शब्द प्रयोग नहीं किये गये फिर भी धारा 68 से धारा 72 तक इसको उल्लेखित किया गया है

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