भारत देश में अपकृत्य के मामले न्यायालय में अभी तक बहुत ही कम जाते है व जाते भी है तो उनमें से अधिकांश कुछ विशिष्ट अपकृत्यों के बारे में ही होते है। हमारे यहां इसके अविकसित रहने के ये मूल कारण हो सकते है
विधि की अनिश्चितता
भारत में आंग्ल विधि के सिद्धान्त ही अपनाए गए है जिसकी वजह से विधि में कुछ अनिश्चितता है आंग्ल विधि में केवल वहीं सिद्धान्त अपनाए गए है जो साम्या, न्याय तथा शुद्ध अन्त: करण और हमारे यहां की परिस्थितियों के अनुकूल है।
विधि व्यवसाय की उदासीनता
विधि की अनिश्चितता के कारण अपकृत्य का मुकदमा कम ही दायर किया जाता है ऐसे मामलों में दांडिक कार्यवाही की जाती है जिसमें क्षतिग्रस्त पक्ष को कोई आर्थिक सहायता नहीं मिलता । यदि अपकृत्य विधि के मुकदमा चलाया जाय तो नुकसानी भी प्राप्त की जा सकती है।
शिक्षा का अभाव
भारत देश में शिक्षा व जागरूकता की कमी है जिसकी वजह से लोग अपने अधिकारों को नहीं जानते है जब कोई मारपीट हो जाती है तो वह यह जानते है कि केवल इसके लिए दांडिक कार्यवाही हो सकती है उन्हें यह नहीं मालूम कि नुकसानी वसूल करने का भी उनका अधिकार है .
सहनशीलता की मानसिकता
अपने अधिकारों के जानने के अभाव की वजह से अपकृत्य को नजरअंदाज कर दिया जाता है हालांकि इसका दूसरा कारण यह भी है कि यहां लोग सहनशील हैं वे अपकृत्य करने वाले को क्षमा कर देते है कभी- कभी गम्भीर चोट आने के बाद भी यदि वे यह समझते है कि जानबूझकर चोट नहीं पहुंचाई गई तो क्षमा करना उचित समझते है .
पाश्चात्य सभ्यता
अभी यहा पाश्चात्य सभ्यता की मानसिकता रखने वाले लोग है जो सभी चीजें पैसे से नहीं तौलते यदि कोई व्यक्ति किसी भी व्यक्ति की मानहानि कर देता है तो दूसरा व्यक्ति उससे बदला लेना ठीक समझता है मानहानि के लिए क्षतिपूर्ति लेना ठीक नहीं समझता.
मंहगी न्याय के साथ न्यायिक प्रक्रिया में देरी
भारत देश में न्याय प्रणाली महंगी है हो सकता है जितना क्षतिपूर्ति मिले उससे ज्यादा न्यायालय के चक्कर काटने में खर्च हो जाए साथ ही किसी मामले को तय करने में इतना समय लगता है कि आदमी पूरी तरह से परेशान हो जाता है जितनी तकलीफ उसे अपकृत्य से नहीं होती उतना उसे न्यायिक कार्य प्रणाली से होती है
विधि की अनिश्चितता
भारत में आंग्ल विधि के सिद्धान्त ही अपनाए गए है जिसकी वजह से विधि में कुछ अनिश्चितता है आंग्ल विधि में केवल वहीं सिद्धान्त अपनाए गए है जो साम्या, न्याय तथा शुद्ध अन्त: करण और हमारे यहां की परिस्थितियों के अनुकूल है।
विधि व्यवसाय की उदासीनता
विधि की अनिश्चितता के कारण अपकृत्य का मुकदमा कम ही दायर किया जाता है ऐसे मामलों में दांडिक कार्यवाही की जाती है जिसमें क्षतिग्रस्त पक्ष को कोई आर्थिक सहायता नहीं मिलता । यदि अपकृत्य विधि के मुकदमा चलाया जाय तो नुकसानी भी प्राप्त की जा सकती है।
शिक्षा का अभाव
भारत देश में शिक्षा व जागरूकता की कमी है जिसकी वजह से लोग अपने अधिकारों को नहीं जानते है जब कोई मारपीट हो जाती है तो वह यह जानते है कि केवल इसके लिए दांडिक कार्यवाही हो सकती है उन्हें यह नहीं मालूम कि नुकसानी वसूल करने का भी उनका अधिकार है .
सहनशीलता की मानसिकता
अपने अधिकारों के जानने के अभाव की वजह से अपकृत्य को नजरअंदाज कर दिया जाता है हालांकि इसका दूसरा कारण यह भी है कि यहां लोग सहनशील हैं वे अपकृत्य करने वाले को क्षमा कर देते है कभी- कभी गम्भीर चोट आने के बाद भी यदि वे यह समझते है कि जानबूझकर चोट नहीं पहुंचाई गई तो क्षमा करना उचित समझते है .
पाश्चात्य सभ्यता
अभी यहा पाश्चात्य सभ्यता की मानसिकता रखने वाले लोग है जो सभी चीजें पैसे से नहीं तौलते यदि कोई व्यक्ति किसी भी व्यक्ति की मानहानि कर देता है तो दूसरा व्यक्ति उससे बदला लेना ठीक समझता है मानहानि के लिए क्षतिपूर्ति लेना ठीक नहीं समझता.
मंहगी न्याय के साथ न्यायिक प्रक्रिया में देरी
भारत देश में न्याय प्रणाली महंगी है हो सकता है जितना क्षतिपूर्ति मिले उससे ज्यादा न्यायालय के चक्कर काटने में खर्च हो जाए साथ ही किसी मामले को तय करने में इतना समय लगता है कि आदमी पूरी तरह से परेशान हो जाता है जितनी तकलीफ उसे अपकृत्य से नहीं होती उतना उसे न्यायिक कार्य प्रणाली से होती है
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